सीतापुर में खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। जिले में पशु-पक्षियों को बड़े पैमाने पर एंटीबायोटिक्स दिए जा रहे हैं, जिसका सीधा असर आम लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। डेयरी, पोल्ट्री फार्म और मत्स्य पालन से जुड़े लोग कम मेहनत में अधिक मुनाफे के लिए इन दवाओं का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं। यही एंटीबायोटिक्स दूध, अंडा, मांस और मछली के जरिए इंसानी शरीर में पहुंच रही हैं और संक्रमण से लड़ने की क्षमता को कमजोर कर रही हैं।
भोजन के रास्ते शरीर में पहुंच रहा एंटीबायोटिक्स का जहर
विशेषज्ञों के मुताबिक एंटीबायोटिक्स पशुओं को छूने, उनके उत्पादों के सेवन और पर्यावरण के माध्यम से मानव शरीर में प्रवेश कर रहे हैं। इसका नतीजा यह हो रहा है कि सामान्य संक्रमण भी जल्दी ठीक नहीं होते। यह स्थिति आने वाले समय में एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन सकती है। जिले में एंटीबायोटिक्स का यह अवैध और अनियंत्रित उपयोग लगातार बढ़ता जा रहा है।
चिकन में मिले एंटीबायोटिक्स के अवशेष
कुछ समय पहले सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (CSE) की ओर से किए गए अध्ययन में चिकन में एंटीबायोटिक्स के अवशेष पाए गए थे। पोल्ट्री फार्म संचालक मुर्गियों को सिर्फ बीमारियों से बचाने के लिए ही नहीं, बल्कि उनका वजन तेजी से बढ़ाने के लिए भी इन दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि बाजार में ज्यादा मुनाफा कमाया जा सके।
बिना डॉक्टर की सलाह दवा देना खतरनाक
अपर मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश त्रिपाठी ने साफ कहा है कि बिना डॉक्टर की सलाह पशु-पक्षियों को दवा देना गलत है। उन्होंने बताया कि वजन बढ़ाने के लिए एंटीबायोटिक्स का प्रयोग न सिर्फ पशुओं के लिए नुकसानदेह है, बल्कि इसका दुष्प्रभाव इंसानों पर भी पड़ रहा है।
खेती और मत्स्य पालन में भी बढ़ता दुरुपयोग
सिर्फ पोल्ट्री ही नहीं, बल्कि खेती और मत्स्य पालन में भी एंटीबायोटिक्स और रासायनिक पदार्थों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है। फसलों में अधिक उत्पादन की लालच में किसान इन दवाओं का प्रयोग कर रहे हैं, जिसका असर सीधे उपभोक्ताओं की सेहत पर पड़ रहा है।
अनावश्यक प्रयोग से बढ़ रही जानलेवा बीमारियां
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एमपी सिंह चंदेल ने बताया कि एंटीबायोटिक्स का अनावश्यक प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। इसको लेकर विभाग द्वारा लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि पोल्ट्री फार्म, मत्स्य पालन और पशुपालन में एंटीबायोटिक्स का गलत इस्तेमाल कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों को जन्म दे सकता है।
